कामयाबी का अर्थ क्या है? जानिए सफलता की पुरी परिभाषा 2026

कामयाबी का अर्थ क्या है? जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है उल्लेखनीय सफलता वह है जो उल्लेख करने लायक हो l स्पष्ट रूप है l

Hii friend मेरा नाम हैं रेखा देवी में आप लोगों के लिए पोस्ट लिखती हूं ताकि सभी लोग कामयाब हो सके l

से उल्लेखनीय सफलता से तात्पर्य किसी भी क्षेत्र में अपने आपको शिखर पर स्थापित कर देना है l

पढ़ाई लिखाई शासन प्रशासन नौकरी बिजनेस व्यापार राजनीति अन्य किसी भी क्षेत्र में अपने आप को ऊंचाइयों पर स्थापित कर देना ही उल्लेखनीय सफलता है l

कामयाबी का अर्थ क्या है?

आज जिस किसी ने अपने आप को ऊंचाइयों पर स्थापित कर लिया है, उसकी स्थिति शहंशाहों जैसी हो गई है l

हर कहीं उसकी हुकूमत चलती है l उसका सिक्का चलता है l मान सम्मान दौलत रुतबा और ऐशो आराम सब कुछ उसके पास है l

प्रतियोगी परीक्षाओं की दूरियां में भी कुछ ऐसी ही बात है l इन परीक्षाओं में जो उच्च अंक अर्जित कर लेता है, वही शासन प्रशासन में मन वांछित पद प्राप्त करता है l

और मन वांछित पद प्राप्त कर लेने के बाद उस प्रतियोगी के जीवन में क्या परिवर्तन आता है यह आप स्वयं समझ सकते हैं,या उस पद पर जाने पर आपको पता चल जाएगा l

केंद्र सरकार व सरकार राज्य सरकार के कई पद सम्मान और रूतबे से भरपूर होते हैं l कुछ पद और इनकम को दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं जैसे डॉक्टर इंजीनियर आदि के पद परंतु कुछ पैसे और सम्मान

दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं l अपने देखा होगा जिस समय किसी आईएएस या आई पीएस ऑफिसर पीएम सीएम या किसी मिनिस्टर की चमचमाती हुई l

जिस सायरन बजाती हुई लाल बत्ती वाली महंगी कार गुजरती है, उस समय सभी रोमांचित हो उठते हैं l जिस समय इसके आगे पीछे कारों का काफिला चलता है,

उस समय इनकी शान ही कुछ अलग होती है l इसके आगमन पर जब सैकड़ों जवान उन्हें सलामी देते हैं, तो उनका सीना फ़ख से फूल उठता है l

ऐसे सम्मान जनक पद प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं l निश्चित रूप सभी ऐसी सुखानुभूति का सपना अवश्य देखते हैं l यह सभी उल्लेखनीय सफलता के उदाहरण है l

उद्योग व्यवसाय व राजनीति के क्षेत्र में भी कई लोग ऊंचाइयों छू लेते हैं l मुकेश अम्बानी कुमार मंगलम सुन्दर पिचाई डोनला ट्रैम्प नरेन्द्र मोदी विल गेट्स आदि कुछ ऐसे ही नाम हैं,

जिन्होंने अपनी श्रम साधना के द्वारा ऊंचाइयों छू ली है l इन सभी की स्थिति ऊंची सफलता के उल्लेखनीय उदाहरण हैं l शान होती है l

ऐसे लोगों की कुछ लोगों की स्थितियां व पद पैसे की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं,तो कुछ अधिकारी और सम्मान की दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण होते हैं l

ऐसी कामयाबियों हासिल करने वाले लोग अपने जीवन में तो खुशियां प्राप्त करते ही है,

साथ ही उनकी इस कामयाबी से उनके माता पिता परिवार गांव व समाज के लोग भी गर्व का अनुभव करते हैं l

ऐसी उपलब्धियां प्राप्त करने पर उस व्यक्ति एवं उससे जुड़े लोगों की पारिवारिक सामाजिक स्थितियों में भी अन्तर आ जाता है l

स्वयं कामयाब व्यक्ति को फूलमालाएं तो चढ़ती ही है, साथ ही उसके माता पिता व परिवार वालों का भी सम्मान बढ़ जाता है l

जब कामयाब व्यक्ति से या उसके माता पिता से इस कामयाबी के संबंध में इंटरव्यू लिया जाता है l

दो शब्द बोलने को कहा जाता है तो उस समय वे अपनी सुख की आंसुओं को थमा नहीं पाते l

उन्हें लगता है कि उनकी जिन्दगी का सपना आज फल फूल कर एक कल्पवृक्ष का रूप धारण करके उनके सामने खड़ा हो गया है l

उनके जीवन की तमन्नाएं साकार रूप में उनकी झोली में डाल दो गई है l

सच मानिए कामयाबी का वह पल वह आनन्दानुभूति बखान से बाहर की बात होती है l मुख से अल्फ़ाज़ नहीं नहीं आते सिर्फ आंसू या अ श्रमय चंद शब्दों से वे अपनी अनन्त खुशी का इज़हार कर देते हैं l

परन्तु ध्यान देने की बात है कि सभी को ऐसी कामयाबी नहीं मिल पाती l इसके लिए व्यक्ति को कठिन से कठिन श्रम साधना से गुजरना पड़ता है l

कई प्रकार की कसौटियों और परीक्षाओं से गुजर कर अपनी काबिलियत को साबित करना पड़ता है l जो व्यक्ति अपने जीवन में होने वाले संघर्षों व कदम कदम पर होने वाली परीक्षाओं में खरे उतरते हैं,

वे ही जमाने के सफ़ल व्यक्ति माने जाते हैं l दुनिया उन्हीं को सलाम करती है l समाज के लोग उन्हीं को प्राथमिकता देते हैं l

ऐसी ही लोग समाज का नेतृत्व करते हैं l और समाज उनका अनुगमन करता हुआ नजर आता है l

स्मरणीय है कि आज के दौर में ऐसी सफलताओं के लिए तकनीकी और कौशल के साथ अध्ययन व अन्य कार्य करने की आवश्यकता होती है l

आप भी प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल हो सकते हैं, या एक आई, ए, एस, बन सकते हैं, जानिए कैसे?

आज के दिन में भारतीय प्रशासनिक सेवा एक ओर जितनी ही कठिन परीक्षा है,

वह दूसरी ओर उससे भी ज्यादा प्रतियोगिता के आकर्षण का केन्द्र भी बनी हुई है l

स्नातक डिग्री कर चुकने वाले प्राय अधिकारी विद्यार्थी इसकी परीक्षा देकर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं l

चूंकि इसकी नियमित वैकेंसियन साल दर साल निकलती रहती है, और प्रतियोगियों को परीक्षा देने के सरल अवसर नियमित रूप से मिलते रहते हैं l

लगभग वहीं स्थिति राज्य सिविल सेवाओं में भी रहती है l कुछ लोगों को तो देखा गया है कि वे अपनी बुद्धिलब्धि क्षमता को समझते हुए अपना केरिया चुनने के लिए पूर्व से ही बहुत अच्छा निर्णय ले लेते हैं l

उदाहरणार्थ कुछ लोग संबंधित विषय में स्नातकोबत्तर पी. एच. डी. बी. एड. एम. एड. आदि का पाठ्यक्रम पूरा कर लेते हैं,

और शिक्षकीय पेशे में जाना अच्छा समझते हैं l कुछ लोग रेल्वे बैंकिंग व अन्य तरह की हल्की नौकरियों वाले पोस्टों में नौकरी प्राप्त करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं,

साथ ही वे उनके लिए सतत नियमानुसार बारीकी व तकनीकी के साथ तैयारी भी करते हैं, और अधिकांश लोग अपने मकसद में सफल भी हो जाते हैं l

वास्तव में ऐसे लोग प्रशंसनीय है, क्योंकि वे अपनी काबिलियत को अच्छी तरह से समझ कर एक समुचित निर्णय लेने वाले व्यक्ति होते हैं l

दूसरी तरफ कुछ महान बुद्धिलब्धि वाले वे विद्यार्थी भी प्रशंसनीय है जिनमें महान सोच बसती है l

भारतीय सिविल सेवाओं में या ऐसे राज्य सिविल सेवाओं के पैदा पर जाकर इस माध्यम से देश के दबे कुचले सताए हुए लोगों की सेवा करके उनको संकटों से निकाल कर उनका उद्धार करके उन्हें विकास की

धारा में लाकर खड़ा करने और इस माध्यम से देश में विकास क्रम को सशक्त बनाने की जुनून उनके मन में बसी हुई होती है l

वे ऐसा करके अपने देश को एक नवीन दिशा प्रदान करना चाहते हैं और बहुत बक बक झक झक से कोई मतलब नहीं रखते l

चुपचाप अपने मकसद में कामयाब होते हैं l परिश्रम और तकनीकी का साथ कभी नहीं छोड़ते अंत में सचमुच वे आई. ए. एस बन जाते हैं l

दूसरी तरफ अधिकांश स्नातक डिग्री किए हुए प्रतियोगी बड़ी तेजी से बिना कुछ सोच विचार किए हुए भारतीय सिविल सेवा व राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं की ओर आकृष्ट होते हैं,

और झटपट परीक्षा सामग्री का अम्बर लगा कर तैयारी प्रारंभ कर देते हैं l अगर उनसे कोई पूंछे आप क्या कर रहे हैं l

तो बड़े गर्व के साथ उनका उत्तर होता है हम आई. ए. एस. की तैयारी कर रहे हैं l लेकिन सुनने वाला अपने मन ही मन में उन्हें उत्तर दे देता है, ऐसे तो बहुत से लोग करते रहते हैं l

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि शायद ऐसे लोगों को लोग नकारा या भटका हुआ व्यक्ति मनाते हैं l और इसमें बहुत हद तक सच्चाई भी होती हैं,

क्योंकि ऐसे लोगों में अपनी काबिलियत नाकाबिलियत को पहचानने की क्षमता का न होना ही उनका सबसे बड़ा दोष कमजोरी और अपने केरियर के साथ

सबसे बड़ी नाइंसाफी मानी जाती है l दर असल ऐसे लोगों को पता ही नहीं होता कि भारतीय सिविल सेवा परीक्षा या राज्य सिविल सेवा परीक्षाएं होती l

क्या चीज है l कोई उन्हें कुछ समझाए कहे तो क्या वे कहते हैं कि हम सब कुछ जानते हैं l

हम दुनिया का हर कार्य कर सकते हैं l जब मिट्टी में दबा हुआ कोयला एक दिन हीरा बन जाता है तो क्या हम एक आई. ए. एस. नहीं बन सकते l

फिर ये लोग मेहनत भी खूब करने लगते हैं l दिन दिन रात रात भर पढ़ते हैं l शरीर को तोड़ कर रख देते हैं l

सिविल सेवा की वैकेंसी निकली दौड़ा कर फॉर्म अपलाई कर देंगे वैक्सीनियों को देख देख कर बहुत खुश होते हैं l इस साल अच्छी वैकेंसी है l

इसमें हमारा चयन हो सकता है l हां यह जरूर पता नहीं होता कि वे दिन दिन रात रात भर पढ़ते क्या है l

सामान्य रूप से देखने पर तो उनमें एक प्रशासनिक अधिकारी बनने की क्वालिटी दिखाई नहीं देती पर उनसे बात भी करना व्यर्थ l वे बता बता पर तुनक उठते हैं l

आग जैसे जल उठेंगे अगर उनका चले तो वे तुरंत किसी को फांसी दे दे गोली भार दें l

जिसी से पाए लड़ बैठोगे किसी को देख नहीं सकेंगे ईष्र्या क्रोध दुस्साहस अधैर्य निन्दा प्रभाव आदि अवगुण जैसे छिलके पड़ रहे हों l

बात करने का बोलने का लिखने पढ़ने का कोई सलीका नहीं टी. वी. या रेडियो पर कोई महत्वपूर्ण बहस छीड़ो हो देश दुनिया में क्या हो रहा है l

उनसे उनका कोई लेना देना नहीं उन्हें बहुत मेहनत करना है बस मेहनत के दम पर तो वे सारी दुनिया को झुका देंगे l

हां कोई नई पुरानी फिल्म का नाम आ जाए तो पर बड़ी दिलचस्पी लेंगे मोबाइल पर फिल्मों व गानों का हज़ारों का संग्रह कर लेंगे जब देखो मोबाइल पर न जाने क्या चलाते रहेंगे l

हमेशा फेसबुक वाट शाप व यूट्यूब की दुनिया में उलझे नजर आएंगे उन्हें कोई व्यक्ति सफलता की तकनीकी बताए तो वे बोलेंगे हम सब कुछ जानते हैं l

हमें इसकी कोई जरूरत नहीं हां जब पढ़ेंगे तो इतनी गहराई से कि रामचरित मानस की रचना किसने की तुलसीदास की पत्नी का माता पिता का नाम क्या था l

उन्होंने क्यों संन्यास ले लिया तुलसीदास किस कुल के ब्राह्मण थे l तुलसीदास का जन्म किस नक्षत्र में हुआ था l

अमुक जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या कितनी है l इस जिले की जनसंख्या कितनी है l

इस जिले में रोड की लंबाई कितनी है l प्रारंभिक परीक्षा आई तो परीक्षा दे देंगे बड़े गर्व से कहेंगे मैंने 80/90/प्रश्न सही हल किए हैं l मेरा चयन हो जायेगा l परन्तु जब रिजल्ट आयेगा तो उनका रोल नंबर गायब होता है l

फिर बहुत रोएं धोएंगे मेरा मेहनत बरबाद हो गया l मेरे सारे अटेम्प्ट खराब हो गए मैं किसी काम का नहीं रह गया नहीं रह गई l

लगता है मैं आत्महत्या कर लूं अंत में ये बेचारे निरीह चार पांच साल तक तो हर हालत में सिविल सेवा परीक्षा का दामन छोड़ कर दुम दबा कर भाग ही जाते हैं l

उन्हें अपने किए धरे की भी खूब याद आती है, पर उनके पास अब सिर्फ प्रायश्चित ही बचा होता है l और इस प्रायश्चित को अकेले ही भोगना वे उचित मानते हैं l

कभी कभी वे किसी से कह भी डालते हैं कि अगर समय रहते हमारे पास समझ जाग गया होता तो आज हम समाज में सम्मान और रूतबे की जिन्दगी जी रहे होते l

पर क्या करें समय रहते हमारे दिमाग पर पत्थर पड़ गया था l आज समझ जागी है तो सफलता का समय निकाल चुका है l अब तो सिर्फ रोना पछताना ही रह गया है l

प्रतियोगी भाई बहने अन्यथा ने लें निम्नस्तर के प्रतियोगियों की चाल ढाल और उनकी भावी परेशानी का एक खाका खींच कर उन्हें सही रास्ते पर चलने आचरण करने और उनके अपने व्यक्तित्व निर्माण एवं

संतुलित व सम्यक अध्ययन का एक आइना दिखाने के लिए प्रयास स्वरूप ये पंक्तियां लिखा दी गई है l

आइए आगे अब हम विचार करते हैं कि एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए प्रतियोगी के सामान्य लक्षण कैसे होने चाहिए कहते हैं कि

होनहार बिरवान के होता चिकने पात इनका संस्कार बचपन से ही अत्यंत जिज्ञासु कुशाग्रबुद्धि पठन पाठ नशील व दुनियावी तड़क भड़क से प्राय दूर रहते है l

बचपन से ही उनके मन में जज्बात उठती रहती है कि काश वे इस दुनिया में आकर कुछ ऐसा करके

जाएं जिससे धरती पर कुछ दिनों तक उनके पदचिन्ह कायम रह सकें इतना ही नहीं युवा होने के साथ साथ उनका एक केंद्रित लक्ष्य बन जाता है l

और वे उस पर तन मन धन से समर्पित हो जाते हैं l वे अपने छोटे से छोटे कार्य को भी टारगेट बना कर करते हैं, किसी बड़े कार्य को कई इकाइयों और टुकड़ों में बांट कर करते हैं l

और जिस समय किसी एक इकाई पर कार्य करते हैं उस उस समय केवल उस पर ही अपना सारा फोकस रखते रखते हैं l

और समय सीमा में उसे पूरा करके ही दम लेते हैं l अपना कार्य कभी अधूरा नहीं छोड़ते भले ही उसके लिए उन्हें कितनी भी कठिनाई क्यों न झेलनी पड़ जाए सतत व्यक्तित्व निर्माण उसके दिमाग से सजगता से

चलने वाली एक प्रक्रिया, बना जाती है, जो सतत एक्टिव रहने वाली साफ्टवेयर के सामान कार्य करती रहती है l

वे सपने में भी अपने लक्ष्यानुसार आचरण करते हैं l अगर उनका लक्ष्य एक आई. ए. एस. अधिकारी बनने का बन चुका है तो सोते जागते एक आई. ए. एस. का ही आचरण करते हैं l

निगेटिव थिकिंग और आचरण उन्हें सपने में भी नहीं छू पाती उनके बात करने का उनके लिखने पढ़ने का तरीका बहुत सलीकपूर्ण होता है l

ये काफी ओपेन माइंड के मृदु भाषी व संवेदनशील होते हैं l दुनिया के लोगों की समस्याओं को अपने साथ घटने वाली समस्याएं मानते हैं l और उन समस्याओं से मुक्त का समुचित मार्ग खोजते हुए काफी संघर्ष शील रहते हैं l

इसके साथ साथ उन्हें एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए कितने चीजों की किस स्तर की सामग्री के अध्ययन की जरूरत है,

वे बख़ूबी समझते हैं l वे आवश्यक और अनावश्यक सामग्री की पहचान करना बहुत अच्छे से जानते से जानते हैं, और मिथ्या सामग्री पर अपना दिमाग व्यर्थ

में नहीं खपाते और जरूरत की महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री पर उनका फोकस चहुमुखी व समग्र रूप में होता है l अपने देश की व समस्त विश्व में घटने वाली

घटनाओं पर उनकी पैनी नजर होती है l वे विश्व को एक परिवार जैसे समझते हैं l ये समय के पाबन्द रह कर अपना प्रत्येक कार्य संतुलित रूप में करते हैं l

क्रोध ईष्र्या निन्दा प्रशंसा आदि के प्रभाव उन्हें छू भी नहीं पाते ये सुनने व मनन करने के बाद ही कुछ बोल पाते हैं l

सुनने अधिक है बोलते कम है अपनी कमियों की सतत खोज और उन्हें दूर करना इनकी सतत प्रकृति बन जाती है l

और ऐसे लोग वास्तव में बड़े धैर्यवान व साहसी होते हैं l और सच मानिए इनके वार महाभारत के अर्जुन से जरा भी कम नहीं होते l वे लक्ष्य भेदना करने में निश्चित कामयाब रहते हैं l अर्थात् ये सचमुच में एक दिन आई. ए. एस. बन जाते हैं l

दोस्तों इस दुनिया में प्रतिभा का कोई जवाब नहीं है l प्रतिभाओं का रास्ता रोकने वाली दुनिया की कोई चीज आज तक सामने दीवार या पहाड़ बन कर नहीं आ सकी है l

न ही भविष्य में आने वाली है l हां अधकचरे लोगों के सामने बाधाओं और कमियों के पहाड़ ही पहाड़ है,

जिन्हें समझिए वे व्यक्ति के स्वजनिक होते हैं l व्यक्तित्व अपने कर्मों के द्वारा अपने भाग्य का निर्माता स्वयं ही होता है अब आप में अपना मूल्यांकन स्वयं कर सकते हैं l

कि आप किस प्रकार के विद्याओं या प्रतियोगी, हैं l यदि आप में आई. ए. एस. बनने के लिए उपरोक्त गुणों में से आधे भी गुण विद्यमान हों तो आप आधे अन्य गुणों को अपने सतत अभ्यास व दृढ़ संकल्प के माध्यम से

विकसित कर सकते हैं और अपना समय पूरा कर सकते है l अगर आप में ये गुण विद्यमान नहीं है तो अच्छा हो कि आप अपना समय बरबाद न करें

और अपनी स्तर की पहचान करके उसके अनुकूल रोजगार के अवसर प्राप्त कर जीवन बसर करने का प्रयास करें l

पूर्व में बताए गए हैं प्रतियोगियों की तरह धोबी का कुत्ता घर का न घाट का जैसे सनकी प्रतियोगी तो कभी भी न बनें एक और बात अगर सुबह का भटका व्यक्ति शाम को भी घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहा जाता l

कहने का तात्पर्य यह है कि आदत के बिगड़े इंसान भी अगर सच्ची आत्मा से अपनी भूलों को कबूल कर लेते हैं l

और दृढ़ संकल्प के साथ अपने साथ सुधार की प्रणाली लागू कर लेते हैं तो वे सही रास्ते पर आ जाते हैं,

और लक्षित कार्य करने में सफल हो जाते हैं l अंत आप यदि इस किस्म के विद्यार्थी हैं तो भी निराश मत होइए अपने लिए सच्चाई और ईमानदारी का रास्ता चुनिए आप लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे l आपकी सफलता के लिए हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है l

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